मेरा इम्तेहान जो तू ले रहा है, अब ना रियायतें कर,
मैंने इश्क सीखा मैने प्यार सीखा तू चाहे नफरतें कर
अजीब रिश्ता है तेरा मेरे साथ, मुझी को छोड़ कर जाना है और मशवरा भी मेरे साथ
मेरा इम्तेहान जो तू ले रहा है, अब ना रियायतें कर,
मैंने इश्क सीखा मैने प्यार सीखा तू चाहे नफरतें कर
ये साल मैं तुझे भुला पाऊं, बस इतनी सी दुआ करना
मेरे दिल से जुदा हो तू, अब इस कैद से मुझे रिहा करना
आज़ाद होने का हक तो है मुझे भी, इतना सा तो रहम खा
बीते लम्हों की सुध ले कभी, और थोड़ा तू भी तड़प जा
नया साल मुबारक हो तुझे, थोड़ी इनायत मुझ पर भी कर जा
यूं अकेले, रोते, बिलखते, अब और ना गुजारे जाएंगे मुझसे ये दिन
या तो अब तू भी साथ आ, या फिर मेरा कत्ल ही कर जा
I promised to keep you happy
Singing and dancing forever
I promised it to meआज तेरी खुशी में तुझसे मिल जाऊं, ये तो मुझे हक नहीं
पर हर लम्हे में बसी तेरी चाह ना हो, इतना भी खुद पर मेरा बस नहीं
जब से गई है मेरा शहर छोड़ कर तू, तुझे इस बात का ज्ञान नहीं
चिरागों में आग नहीं, किसी शहरी के चेहरे पर मुस्कान नहीं
तो क्या हुआ, ये सालगिरह तू मेरे साथ नहीं, मैं तेरे साथ नहीं
ज़हन में मेरे, तू न हो कभी, ऐसा एक भी पल मुझे याद नहीं
तेरी यादों को कुछ इस तरह समेट रखा है मैंने कहीं
तुझे जीने के लिए मुझे, तेरे साथ होने की दरकार नही
ये जो महफ़िल है, यू ही आबाद रहे, ये शाम कभी तमाम न हो
दवा हो, दारू हो, तेरा ज़िक्र हो और इस आशिक को कभी आराम न हो
और ये जो शायर है, न जाने किस दर्द का मारा है
मालूम होता है, इसके अपनों ने ही इसके दिल में खंजर उतारा है
इसके दर्द का हिसाब तो बस कुछ इस तरह बयान है
की
तेरे होने से जो बरकत थी, वो समां अब कहां है
तेरे दिए ज़ख्म भी आज तक हरे हैं, मेरा कल का लगाया पेड़ भी आज फना है