आज तेरी खुशी में तुझसे मिल जाऊं, ये तो मुझे हक नहीं
पर हर लम्हे में बसी तेरी चाह ना हो, इतना भी खुद पर मेरा बस नहीं
जब से गई है मेरा शहर छोड़ कर तू, तुझे इस बात का ज्ञान नहीं
चिरागों में आग नहीं, किसी शहरी के चेहरे पर मुस्कान नहीं
तो क्या हुआ, ये सालगिरह तू मेरे साथ नहीं, मैं तेरे साथ नहीं
ज़हन में मेरे, तू न हो कभी, ऐसा एक भी पल मुझे याद नहीं
तेरी यादों को कुछ इस तरह समेट रखा है मैंने कहीं
तुझे जीने के लिए मुझे, तेरे साथ होने की दरकार नही